०० भोंदू दास प्रकरण से जुड़ा हुआ है तत्कालीन तहसीलदार नारायण प्रसाद गवेल रमेश कुमार मोर पटवारी अशोक जायसवाल के नाम

बिलासपुर| शहर एवं शहर के आसपास इतने जमीन घोटाले के प्रकरण है जो की दबी पड़ी है। परंतु ऐसा क्या हुआ? कि चिल्हाटी के प. ह. न. 19/29 के मामले में रातो रात थाना सरकंडा में एफआईआर दर्ज कर एक अनपढ़ गरीब रिक्शा वाले भोंदू दास मानिकपुरी के साथ ही कुछ अन्य को गिरफ्तार कर उसकी रिपोर्ट रायपुर भेजनी पड़ी। अक्सर ऐसा होता है की शहर एवं गांव का कोई फरियादी सालों साल अधिकारियों से न्याय पाने की आस में इधर-उधर भटकता फिरता है परंतु न्याय नहीं मिलती। और तब वह हाई लेवल प्रयास करता है। भोंदू दास प्रकरण में भी यही हुआ फरियादी थाना पुलिस तहसील कलेक्ट्रेट जाते-जाते थक गया तो उन्होंने अपने एक परिचित के माध्यम से अपने फरियाद वरिष्ठ केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के पास रखा तो उक्त कैबिनेट मंत्री ने अपने ओएसडी से इस प्रकरण में अभिलंब कार्रवाई करने के लिए कहा फिर उसके बाद क्या था कैबिनेट मंत्री के ओएसडी का एक फोन और खुल गया वर्षों से दबी भोंदू दास जमीन घोटाले की फाइल|

रायपुर से इस केस के फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेशन के ओपिनियन भी आ चुकी है जिसकी जांच रिपोर्ट सीएसपी कोतवाली स्नेहिल साहू द्वारा उच्च अधिकारियों को दी जा चुकी है। इस प्रकरण में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि भोंदू दास प्रकरण की फाइल नहीं खुलती तो अब तक इस कीमती सरकारी जमीन को तत्कालीन तहसीलदार नारायण प्रसाद गबेल द्वारा दयालबंद के एक भू माफिया को करोड़ों रुपए में बेच चुके होते। यह एक बहुत बड़ा जमीन घोटाला कांड है जिसका मुख्य आरोपी कभी नेहरू नगर, कभी मनेंद्रगढ़ तो कभी बिजुरी कोतमा में भेष बदल कर रह रहा है। और जब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और पुलिस इन आरोपियों को रिमांड पर लेकर अच्छी तरह पूछताछ नहीं करती तब तक इस घोटाले की असलियत सामने नहीं आ पाएगी। इधर एक व्यक्ति ने एसएसपी पारुल माथुर को इस संबंध में एक नई शिकायत दी है इसमें कहां गया है कि भोंदू दास जमीन घोटाले में प्रत्यक्ष रुप से तत्कालीन तहसीलदार नारायण प्रसाद गवेल रमेश कुमार मोर पटवारी अशोक जायसवाल शामिल है। वही क्रांति कुमार दुबे नाम का एक युवक भी शामिल है जोकि नारायण प्रसाद गवेल के अवैध संपत्तियों का हैंडलिंग करता है इन सब के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर इन्हें सह आरोपी बनाने की आवश्यकता है । प्रकरण पूर्व तहसीलदार एन पी गवेल एवं कुछ अधिकारियों एवं भू माफियाओं द्वारा एक गिरोह बनाकर करोड़ों की सरकारी जमीन को बेचने में की गई फर्जीवाड़े से संबंधित है जिससे शासन को करोड़ों रुपए की राजस्व की हानि हुई है इस कारण इसकी जांच ईओडब्ल्यू भी अपने स्तर पर करें जिससे यह सिद्ध हो जाएगा की घोटाले का मास्टरमाइंड गरीब अनपढ़ रिक्शावाला भोंदू दास मानिकपुरी नहीं है बल्कि कोई और ही है|