जांजगीर चाम्पा| अकलतरा में फिर से एक परिवार ने अपना पिता , भाई और बेटा खो दिया । एक स्कूल ने.अपना अच्छा प्रिसिपल और विद्यार्थियों ने एक आदर्श शिक्षक खो दिया कारण था अनियंत्रित यातायात व्यवस्था, अव्यवस्थित आवाजाही और हमारे तंत्र की कमजोरी और सबसे बडी वजह हमारी राजनीतिक समीकरण के कारण हमारी प्रशासनिक कमजोरी ने यह जान गंवा दी । लोग आवेश में थे पर प्रशासन और पुलिस को प्रशिक्षण के दौरान ही सीखाया जाता है कि भीड़ तंत्र को कैसे नियंत्रित करना है सो भीड़ तंत्र के कुछ अगुवाई कर रहे लोगो ने यह मामला शांतिपूर्ण ढंग से निपटा दिया । सुबह से चल रहे.घटनाक्रम पर समझौता हुआ और पुलिस तथा प्रशासन ने राहत की सांस ली । कल से वही सड़कें और वही भागदौड़ । अब इस घटना क्रम मे क्या छूटा और क्या पाया , यह अगर हम देखे तो पाते है कि इस तरह की अनगिनत घटनाओं के बाद मंथन इस बात पर होना था कि इन घटनाओं को रोकने या दूर्घटनाओ को कम करने के लिए क्या हो सकता है , इस..पर विचार करने का समय किसी के पास नही था ।

अब किसी और का परिवार न उजड़े , यह सोचने का समय भी नही था और सबसे बड़ी बात यह कि धार्मिक आस्थाओं पर ठेस को.मुद्दा बनाकर प्रशासन.और.पुलिस के नाक में दम करने वाले दलो को भी ऐसे वीभत्स हादसो से न रोष आया , न गुस्से से उनकी मुट्ठियाँ भीची और न ही गुस्से से उनकी आंखें लाल हुई । यह आश्चर्य जनक बात है कि यह देश और समाज ईश्वर की निंदा करने वाले.को यह कहकर नही छोड़ता कि इसे इसकी सजा भगवान खुद देगा , बल्कि खुद सजा देने पर उतारु हो जाता है , गाय को माता मानने वाला देश गाय को खुले में छोड़कर गाय पर राजनीति करता है परंतु यही देश और यही समाज दूर्घटनाओ को रोकने या जनहित मामलो में प्रशासन पर दबाव बनाने नेताओं का मुंह ताकता है ? उन्हें अपनी रोजी – रोटी और परिवार की चिंता सताती है लेकिन इस परिवार के उजड़ने से हुआ सफर कभी मुझपर भी आ सकता है हम सोच ही नही पाते है  आज की दूर्घटना में क्या ऐसा नही किया जा सकता था कि मृत शिक्षक परिवार के सदस्यों को अंतिम संस्कार के लिए रवाना कर बायपास सड़क की मांग लेकर जिला कलेक्टर के पास पहुंचते और हर हाल में बायपास सड़क के निर्माण जल्द शुरू करने का आश्वासन जिला कलेक्टर से लेते माहौल बेहद गर्म था और ऐसे गर्म माहौल में प्रशासनिक अधिकारी बेहद विनम्र हो जाते है और उस समय उनके पास हमारे मर्म पर मरहम लगाने के , हमारी जायज मांग मानने के सिवाय और कोई चारा नहीं होता परंतु ऐसा कुछ भी नही हो सका और हमने फिर किसी परिवार के उजड़ने के लिए नगर के माहौल में बिना बदलाव यथा स्थिति से समझौता कर लिया है ।