बिलासपुर| घर मे जब बच्चे की किलकारी गूंजती है तो माता पिता के लिए इससे बड़ा तोहफा कुछ नही होता, पर आज हम आपको ऐसी खबर से मुखातिब कराने जा रहे है जिसे पढ़ कर आपकी आंखों से आंसू निकल पड़ेंगे, ये पूरा मामला मस्तूरी के पचपेड़ी क्षेत्र का है। जहाँ 7 महीने पहले एक बच्ची ने जन्म लिया था, जिसके माता पिता ने उसका नाम आहना रखा था, पूरे परिवार में खुशी का माहौल था, पर किसे पता था, की दुधमुंही आहना चंद महीनों में ही इस दुनिया से अलविदा कह देगी। क्योकि इस बार कोरोना ने महज 7 महीने की बच्ची को अपना शिकार बनाया, जिसे बीमार हालत में उसके माता पिता ने इलाज के लिए सिम्स में भर्ती करा दिया, जिसके बाद अहाना के माता पिता ने उससे मुह ही मोड़ लिया।

और 29 अप्रैल को मासूम आहना की सांसे थम गई। क्या कोई मां बाप इतने पत्थर दिल हो सकते है की वे अपनी 7 महीने की दुधमुंही बच्ची को लावारिश छोड़ कर चले जाएं।वही अहाना के परिजनों से संपर्क करने स्वास्थ्य अधिकारियों ने चारों तरफ हाँथ पैर मारे पर अहाना के माता पिता का कुछ पता नही चला और जब परिजनों के मोबाइल पर कॉल किया गया तो उनका मोबाइल बंद बताया, आस पड़ोस के लोग भी कुछ भी बताने से इनकार कर दिया, इधर अहाना के माता पिता की तलाश जारी थी, उधर मासूम की लास दाहसंस्कार के लिए मरचुरी में इंतेज़र कर रही थी, पर कोरोना के आगे शायद उनकी ममता ने दम तोड़ दिया, लाख कोशिशों के बाद सभी बेबस हो गए पर अहाना के माता पिता की ममता नही जागी, तो अंत मे शासन के नियमानुसार 72 घण्टे के इंतज़ार के बाद आहना के मृत शरीर का रविवार की शाम पंचनामा कर नायाब तहसीलदार और स्वास्थ्य अधिकारियों की उपस्थिति में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान एक स्वास्थ्यकर्मी मासूम अहाना की लाश को गले से लगा कर रखा था, वही सभी की आंखों में दर्द साफ झलक रहा था, पर अहाना के परिजनों का दिल नही पसीजा।